छह साल पुराने हत्या और आपराधिक साजिश मामले में फैसला; 27 गवाहों और 106 दस्तावेजों को बनाया गया साक्ष्य
सादुलपुर। चूरू जिले के बहुचर्चित ओमप्रकाश हत्याकांड में करीब छह साल बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सेशन न्यायालय क्रमांक-प्रथम के न्यायाधीश मुनेश चंद यादव ने हत्या और आपराधिक साजिश के मामले में यह फैसला दिया।
अदालत ने सुरेश कुमार, राजकुमार उर्फ लिलिया, धर्मेंद्र उर्फ फौजी, अमरसिंह और संजय को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराया। पांचों को आजीवन कारावास के साथ अर्थदंड से भी दंडित किया गया है।
लिव-इन संबंध को लेकर चल रही थी रंजिश
अभियोजन पक्ष के अनुसार, ओमप्रकाश जालोर में निजी नौकरी करता था। इसी दौरान उसकी गांव की रहने वाली प्रियंका देवी से पहचान हुई और दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे।
प्रियंका पहले से विवाहित थी। उसका पति सुरेश कुमार इस संबंध का विरोध करता था। अभियोजन का कहना था कि इसी बात को लेकर सुरेश और ओमप्रकाश के बीच लंबे समय से रंजिश चल रही थी।
गांव छोड़कर लौटते समय किया पीछा
अभियोजन के अनुसार, 2 मई 2020 की रात ओमप्रकाश प्रियंका को उसके गांव छोड़कर वापस लौट रहा था। इसी दौरान दोषियों ने वाहन से उसका पीछा किया और साजिश के तहत उसकी हत्या कर दी।
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अगले दिन ओमप्रकाश का शव भैंसली की रोही में मिला। सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाया और मामले की जांच शुरू की।
कॉल डिटेल और परिस्थितिजन्य साक्ष्य बने आधार
पुलिस अनुसंधान पूरा होने के बाद पांचों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 27 गवाहों के बयान दर्ज करवाए और 106 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। मोबाइल कॉल डिटेल, तकनीकी साक्ष्य और घटनाक्रम से जुड़ी परिस्थितिजन्य कड़ियों को भी अदालत के सामने रखा गया।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए पांचों को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अधिवक्ताओं ने की पैरवी
मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता सलीम खान ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक सुनील जांगिड़ ने अदालत में पक्ष रखा।
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