राजलदेसर/रतनगढ़। राजलदेसर राजकीय चिकित्सालय में मरीज की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही और समय पर रेफर नहीं करने के गंभीर आरोप लगाए। घटना के बाद अस्पताल के बाहर धरना शुरू हो गया, जहां परिजन डॉक्टर पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग पर अड़े रहे।

मृतक की पहचान रामलाल भाट के रूप में हुई है। परिजनों का कहना है कि तबीयत बिगड़ने पर उन्हें राजलदेसर अस्पताल लाया गया था, लेकिन हालत गंभीर होने के बावजूद समय रहते उचित कदम नहीं उठाया गया। इसी बात को लेकर परिवार और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।

इलाज में देरी और रेफर प्रक्रिया पर उठे सवाल

परिजनों का आरोप है कि मरीज की हालत बिगड़ती देख बार-बार उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर करने की मांग की गई, लेकिन समय पर निर्णय नहीं लिया गया। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते मरीज को रेफर कर दिया जाता, तो स्थिति अलग हो सकती थी।

आरोप है कि रेफर करने में देरी के बाद मरीज को बीकानेर ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने तक हालत काफी बिगड़ चुकी थी। बाद में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और राजलदेसर अस्पताल के बाहर विरोध शुरू हो गया।

अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे परिजन

मरीज की मौत की खबर राजलदेसर पहुंचते ही परिवार के लोग और स्थानीय नागरिक अस्पताल के बाहर एकत्र हो गए। परिजनों ने शव के साथ धरना देते हुए न्याय की मांग उठाई। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को समय पर उपचार और सही सलाह मिलनी चाहिए।

धरने पर बैठे लोगों ने कहा कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के लोग इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर ही भरोसा करते हैं। ऐसे में यदि गंभीर मरीजों को समय पर रेफर नहीं किया जाता, तो परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

डॉक्टर पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग

परिजनों ने संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

मृतक परिवार के लिए मुआवजे की मांग भी की गई है। परिवार का कहना है कि उन्होंने अपना सदस्य खोया है, इसलिए प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित परिवार को राहत देनी चाहिए।

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प्रशासन और पुलिस ने संभाली स्थिति

अस्पताल के बाहर विरोध बढ़ने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने धरने पर बैठे परिजनों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। हालांकि परिजन अपनी मांगों पर अड़े रहे।

धरने के चलते अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन की ओर से परिजनों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन परिवार निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग पर डटा रहा।

जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों ने भी उठाई आवाज

राजलदेसर अस्पताल के बाहर चल रहे विरोध में स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी पहुंचे। लोगों ने परिजनों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही जैसे आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राजलदेसर और रतनगढ़ क्षेत्र में सरकारी चिकित्सा व्यवस्था आमजन के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में अस्पतालों में इमरजेंसी में मरीजों के इलाज, जांच और रेफर व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

इस घटना के बाद राजलदेसर राजकीय चिकित्सालय की व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि गंभीर मरीजों के लिए अस्पतालों में स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि समय पर प्राथमिक उपचार और जरूरत पड़ने पर तुरंत रेफर किया जा सके।

राजलदेसर, रतनगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग लंबे समय से बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीद रखते हैं। ग्रामीण इलाकों में सरकारी अस्पताल आमजन के लिए पहली उम्मीद होते हैं। ऐसे में उपचार और रेफर प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय हैं।

रतनगढ़ क्षेत्र में चर्चा का विषय बना मामला

राजलदेसर अस्पताल में मरीज की मौत का मामला अब रतनगढ़ क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। परिजनों के आरोप, अस्पताल के बाहर धरना और डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग ने इस मामले को गंभीर स्थानीय मुद्दा बना दिया है।

फिलहाल परिजन निष्पक्ष जांच, डॉक्टर पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी है। यह मामला रतनगढ़ क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े कर रहा है।

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