यह खबर सीधे न्याय के सबसे बड़े मंदिर यानी राजस्थान हाई कोर्ट से आ रही है। कहते हैं कि जब सरकार की नीयत पर रसूख का पर्दा पड़ जाए, तो इंसाफ की आखिरी उम्मीद अदालत की चौखट ही बचती है। और इस बार हाई कोर्ट ने व्यवस्था की उस मनमानी पर कड़ा प्रहार किया है, जो अक्सर नेताओं के इशारे पर नाचती है।
हाई कोर्ट की बड़ी चोट: सस्पेंशन ऑर्डर खारिज
राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने एक बेहद कड़ा और साफ फैसला सुनाया है। अदालत ने चूरू के दबंग परिवहन उप निरीक्षक रॉबिन सिंह के निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है।
अदालत ने इस बात को गहराई से समझा कि रॉबिन सिंह को जो विभागीय नोटिस दिया गया था, उन्होंने उसका पूरा और कानून सम्मत जवाब दिया था। लेकिन रसूखदारों को खुश करने के फेर में विभाग ने उनके जवाब को कचरे के डिब्बे में डाल दिया और सीधे सस्पेंशन का तुगलकी फरमान जारी कर दिया।
कहानी की मुख्य धुरी: वो ₹25 लाख का चालान
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर रॉबिन सिंह ने ऐसा क्या गुनाह कर दिया था कि पूरी सरकार उनके पीछे हाथ धोकर पड़ गई? गुनाह सिर्फ इतना था कि उन्होंने कानून की किताब को राजनेताओं की हैसियत से ऊपर रख दिया।
चूरू के इलाके में एक सड़क खराब थी। रॉबिन सिंह ने नियमों के मुताबिक बाकायदा उस खराब सड़क का 'पंचनामा' तैयार किया। जांच की आंच पहुंची विधायक राजेंद्र भांबू से जुड़ी एक रसूखदार कंपनी तक। रॉबिन सिंह ने बिना किसी खौफ के, नियमों के उल्लंघन की एवज में उस कंपनी पर ₹25 लाख का भारी-भरकम चालान ठोक दिया।
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आप खुद कल्पना कीजिए, जिस देश में एक आम आदमी पुलिस की एक डांट से सहम जाता है, वहां एक सरकारी सब-इंस्पेक्टर सत्ताधारी विधायक की कंपनी के आगे ₹25 लाख का बिल फाड़ देता है। विधायक साहब के रसूख को यह चोट बर्दाश्त नहीं हुई। उन्होंने तुरंत 'उच्च स्तर' पर शिकायत की, दबाव बनाया और 17 अप्रैल को रॉबिन सिंह के हाथ में सस्पेंशन का लेटर थमा दिया गया। लेकिन उनका यह अहंकार हाई कोर्ट तक जाते-जाते ढेर हो गया।
फ्लैशबैक: रॉबिन सिंह और विवादों का पुराना रिश्ता
चूरू के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि रॉबिन सिंह का यह मिजाज नया नहीं है। उनका इतिहास ऐसे ही रसूखदारों से टकराने का रहा है:
करोड़पति बस माफिया पर सर्जिकल स्ट्राइक: रॉबिन सिंह ने चूरू में एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था, जो 'एक ही नंबर प्लेट पर दो-दो बसें' चलाने का अवैध काला कारोबार कर रहे थे। उन्होंने कई करोड़पति ऑपरेटर्स की बसें सीज कीं, जिन पर लाखों का टैक्स बकाया था。 जब इन रसूखदारों की कमाई रुकी, तो वे शिकायत लेकर चूरू एसपी के दफ्तर तक पहुंच गए थे।
विधायक हरलाल सहारण से सीधा टकराव: साल 2024 में एक अवैध डंपर को छोड़ने और कार्रवाई को लेकर रॉबिन सिंह चूरू के ही तत्कालीन विधायक हरलाल सहारण से सीधे भिड़ गए थे। उस वक्त भी उन पर राजनीतिक गाज गिरी थी और उनका तबादला प्रतापगढ़ कर दिया गया था।





