नगर परिषद सभागार में जनप्रतिनिधियों, पूर्व पार्षदों और अधिकारियों ने रखे सुझाव; विरासत संरक्षण, यातायात और शोधित जल के उपयोग पर भी हुआ विचार-विमर्श
चूरू, 6 अगस्त। राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना यानी आरयूआईडीपी के पांचवें चरण में चूरू शहर के लिए प्रस्तावित 24.73 करोड़ रुपये के कार्यों को लेकर गुरुवार को नगर परिषद सभागार में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जनप्रतिनिधियों, पूर्व पार्षदों, अधिकारियों, नागरिक प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से शहर की आधारभूत जरूरतों पर सुझाव लिए गए।
कार्यक्रम में एसडीएम धीरज झाझड़िया, नगर परिषद आयुक्त अभिलाषा सिंह और आरयूआईडीपी के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में अपशिष्ट जल प्रबंधन, शोधित पानी के पुनः उपयोग, ड्रेनेज, विरासत संरक्षण, पर्यटन और यातायात व्यवस्था से जुड़े प्रस्तावों की जानकारी दी गई।
तीन प्रमुख मदों में 24.73 करोड़ रुपये की कार्ययोजना
आरयूआईडीपी के सहायक अभियंता विकास मीणा ने कार्यक्रम में शहर के लिए तैयार प्रारंभिक कार्ययोजना का ब्योरा रखा। बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, अपशिष्ट जल प्रबंधन और शोधित जल के पुनः उपयोग से संबंधित कार्यों पर 11.24 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। इस हिस्से को एशियाई विकास बैंक के वित्तपोषण से आगे बढ़ाए जाने की जानकारी दी गई।
बाढ़ प्रबंधन और ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार के लिए 5.62 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया। इसके तहत शहर में जलभराव की समस्या वाले स्थानों और मौजूदा जल निकासी व्यवस्था की जरूरतों पर काम किया जाना प्रस्तावित है।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, विरासत संरक्षण और पर्यटन से संबंधित कार्यों के लिए 7.87 करोड़ रुपये की राशि बताई गई। तीनों मदों की कुल प्रस्तावित लागत 24.73 करोड़ रुपये है।
कार्यक्रम में शहरी गतिशीलता के तहत यातायात नेटवर्क और परिवहन व्यवस्था में सुधार पर भी चर्चा हुई। हालांकि, इस क्षेत्र के लिए अलग से कितनी राशि रखी गई है, इसकी जानकारी साझा नहीं की गई।
ड्रेनेज और सीवरेज नेटवर्क पर मिले सुझाव
संवाद में शामिल प्रतिनिधियों ने शहर के जलभराव वाले क्षेत्रों में ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करने और सीवरेज नेटवर्क का विस्तार करने का सुझाव दिया। शोधित पानी का अधिक उपयोग सुनिश्चित करने तथा इसे उपयोगी कार्यों से जोड़ने की आवश्यकता भी बताई गई।
विज्ञापन
प्रतिभागियों ने प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रबंधन सुधारने, पार्किंग की व्यवस्था विकसित करने और तकनीक आधारित ट्रैफिक नियंत्रण प्रणाली पर विचार करने की बात रखी। ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के साथ उनके आसपास पर्यटन सुविधाएं विकसित करने के सुझाव भी सामने आए।
पर्यावरण संरक्षण और भविष्य में शहर की आबादी बढ़ने से आधारभूत सुविधाओं पर पड़ने वाले दबाव को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार करने की बात भी कही गई।
स्थानीय जरूरतों को योजना में शामिल करने पर जोर
बैठक में बसंत शर्मा ने कहा कि विकास कार्यों की योजना तैयार करते समय नागरिकों और स्थानीय प्रतिनिधियों की राय को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन पर ध्यान देने की बात कही।
नगर परिषद आयुक्त अभिलाषा सिंह ने कहा कि योजनाओं को शहर की मौजूदा समस्याओं के साथ भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों से तकनीकी रूप से व्यावहारिक और स्थानीय उपयोगिता वाले सुझाव देने को कहा।
अधिकारियों ने कार्यक्रम के दौरान मिले सुझावों को दर्ज किया। इन सुझावों पर तकनीकी परीक्षण और परियोजना की आगे की प्रक्रिया के दौरान विचार किए जाने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में ये अधिकारी और प्रतिनिधि रहे मौजूद
बैठक में भास्कर शर्मा, सीताराम लुगरिया, सुरेश सारस्वत, अधिशासी अभियंता वेदपाल सिंह, सहायक अभियंता इरफान अली, आरयूआईडीपी सहायक अभियंता विकास मीणा, कनिष्ठ अभियंता कैलाश डूडी, नरेंद्र दायमा और योगेश आत्रेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
इसके अलावा फतेहचंद सोती, गोपाल बालाण, अख्तर खान, रवि दाधीच, सुनील भाऊवाला, धर्मेंद्र राकसिया, नीरज जांगिड़, राकेश दाधीच, कमल सैनी, राकेश शर्मा और हरीश वर्मा सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम में प्रस्तावों की निविदा प्रक्रिया, काम शुरू होने की तारीख और कार्यों को पूरा करने की समयसीमा के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।




