मोड़ावासी स्थित ‘निसार इंडियन’ में मद उद्दीपन एवं समकालनीकरण के लिए उपयोग होने वाले अंतःयोनि स्पंज का किया जाएगा निर्माण

नई दिल्ली/चूरू। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस समारोह में चूरू जिले के राजगढ़ क्षेत्र से जुड़े ‘निसार इंडियन’ संस्थान के साथ पशुपालन तकनीक के निर्माण को लेकर समझौता किया गया। यह संस्थान राजगढ़ तहसील के गांव मोड़ावासी निवासी निसार खान द्वारा संचालित किया जाता है।

नई दिल्ली में आयोजित समारोह के दौरान निसार खान को समझौते से संबंधित दस्तावेज सौंपे गए। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कृषि अनुसंधान और पशुपालन क्षेत्र से जुड़े अधिकारी व प्रतिनिधि मौजूद रहे।

निसार इंडियन में होगा अंतःयोनि स्पंज का निर्माण

समझौते के तहत मद उद्दीपन एवं समकालनीकरण हेतु अंतःयोनि स्पंज (Intravaginal Sponge) का निर्माण निसार इंडियन संस्थान में किया जाएगा।

यह तकनीक भेड़ और बकरियों के प्रजनन चक्र को निर्धारित अवधि में समकालिक करने के लिए उपयोग की जाती है। इसके माध्यम से पशुपालक पशुओं के प्रजनन और प्रसव की योजना मौसम, चारे की उपलब्धता और देखभाल की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बना सकेंगे।

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पशुपालन प्रबंधन में कैसे उपयोगी है तकनीक?

एक निर्धारित अवधि में पशुओं का प्रजनन होने से मेमनों और बकरी के बच्चों का जन्म भी अपेक्षाकृत समान समयावधि में कराया जा सकता है। इससे उनके पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार और समूह आधारित देखभाल की व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित हो सकती है।

प्रसव के समय की बेहतर योजना से प्रतिकूल मौसम में बच्चों के जन्म से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन में भी सहायता मिल सकती है। तकनीक का उद्देश्य भेड़-बकरी पालन में प्रजनन प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाना है।

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगी पशुपालन तकनीक

मोड़ावासी स्थित संस्थान में इस तकनीक का निर्माण शुरू होने से भेड़-बकरी पालकों के लिए प्रजनन प्रबंधन से जुड़ा उत्पाद स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगा।

राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में चूरू जिले के संस्थान के साथ हुआ यह समझौता कृषि एवं पशुपालन आधारित ग्रामीण उद्यमिता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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