चूरू में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कलेक्टर सख्त
चूरू जिले के सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने जिले के राजकीय जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में संचालित नि:शुल्क दवा केन्द्रों पर दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने कहा कि आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं समय पर और सुगमता से मिलनी चाहिए। इसके लिए सभी चिकित्सा प्रभारी अपने-अपने संस्थानों में दवा, जांच, साफ-सफाई और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को मजबूत रखें।
नि:शुल्क दवा केन्द्रों पर पर्याप्त दवाएं रखने के निर्देश
जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को दवाओं के लिए परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। नि:शुल्क दवा केन्द्रों पर जरूरी दवाओं की उपलब्धता लगातार बनी रहे।
उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी को देखते हुए दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित न हो, इसके लिए नि:शुल्क दवा केन्द्रों पर वातानुकूलित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। गर्मी के मौसम में दवाओं के रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी दवाएं मिल सकें।
राजस्थान सरकार की नि:शुल्क दवा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में आने वाले आउटडोर और इनडोर मरीजों को आवश्यक दवाएं नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं। ऐसे में अस्पतालों में दवाओं की कमी या रखरखाव में लापरवाही सीधे आमजन की सुविधा से जुड़ा मामला है।
जांच रिपोर्ट में देरी पर भी सख्ती
बैठक के दौरान जिला कलक्टर ने अस्पतालों में जांच रिपोर्ट मिलने में होने वाली देरी को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि मरीजों को जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध करवाई जाए, ताकि उन्हें अस्पतालों में अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
निर्देशों के अनुसार सुबह 11 बजे तक आने वाले मरीजों को जांच रिपोर्ट दोपहर 12 बजे तक उपलब्ध करवाई जाए। वहीं, सुबह 11 बजे के बाद आने वाले मरीजों को शाम 5 बजे तक जांच रिपोर्ट दी जाए।
इस व्यवस्था से मरीजों को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और डॉक्टर भी समय पर रिपोर्ट देखकर उपचार आगे बढ़ा सकेंगे।
मौसमी बीमारियों को लेकर सतर्क रहने के निर्देश
जिला ग्रामीण स्वास्थ्य समिति की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में कलेक्टर ने मौसमी बीमारियों को लेकर भी चिकित्सा विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए। गर्मी, बारिश और बदलते मौसम के दौरान डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार, उल्टी-दस्त और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
कलेक्टर ने चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक दवाएं, प्राथमिक उपचार और जांच सुविधाएं उपलब्ध रहें। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी की जाए।
विज्ञापन
आयुष्मान योजना और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा
बैठक में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना सहित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिला अस्पताल, उप जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर चल रही सेवाओं का जायजा लिया गया।
कलेक्टर ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, एनीमिया मुक्त राजस्थान अभियान, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, जननी सुरक्षा योजना और लाडो प्रोत्साहन योजना जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समय पर मिलना चाहिए। साथ ही परिवार कल्याण कार्यक्रमों और नियमित स्वास्थ्य जांच को लेकर भी चिकित्सा विभाग को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए।
सफाई और एंबुलेंस सेवाओं पर भी ध्यान
बैठक में चिकित्सा संस्थानों की साफ-सफाई, नियमित स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श सेवाओं और इंटीग्रेटेड एंबुलेंस सेवा की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पतालों में मरीजों और परिजनों को स्वच्छ वातावरण मिले। अस्पतालों में साफ-सफाई, दवा वितरण, जांच सुविधा और परामर्श व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग ने पेश की प्रगति रिपोर्ट
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं और चिकित्सा सेवाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस दौरान राजकीय डेडराज भरतिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. दीपक, सांख्यिकी उपनिदेशक डॉ. रामगोपाल सेपट, एसीएमएचओ डॉ. अहसान गौरी, जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. वेदप्रकाश, उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण झुरिया, आरसीएचओ डॉ. शशांक चौधरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
मरीजों को क्या फायदा होगा?
कलेक्टर के निर्देशों के बाद जिले के सरकारी अस्पतालों में दवा उपलब्धता और जांच रिपोर्ट व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। अगर निर्देशों की सही पालना होती है, तो मरीजों को दवाओं के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा और जांच रिपोर्ट भी समय पर मिल सकेगी।
चूरू, रतनगढ़, सरदारशहर, सुजानगढ़, तारानगर, सादुलपुर और बीदासर सहित जिले के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में आने वाले मरीजों के लिए यह फैसला राहत देने वाला साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
चूरू जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने चिकित्सा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। नि:शुल्क दवा केन्द्रों पर दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता, दवाओं की गुणवत्ता, समय पर जांच रिपोर्ट, मौसमी बीमारियों की रोकथाम और अस्पतालों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन के इन निर्देशों के बाद अस्पतालों में मरीजों को कितनी राहत मिलती है और जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं में कितना सुधार होता है।





