जिला कलेक्टर के माध्यम से राजस्थान सरकार तक पहुंचाया पक्ष, धार्मिक और संवैधानिक चिंताओं का किया उल्लेख

चूरू, 5 अगस्त। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की चूरू शाखा के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के विरोध में राजस्थान सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में संगठन ने UCC को लेकर मुस्लिम समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक चिंताओं का उल्लेख किया। संगठन का कहना है कि मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग समान नागरिक संहिता को पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखता है।

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। संगठन ने आशंका जताई कि UCC लागू होने से मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।

विज्ञापन

ज्ञापन में सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा उठाते हुए कहा गया कि भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश है। ऐसे में कानून बनाते समय देश की सामाजिक और धार्मिक विविधता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि देश की एकता एकरूपता के बजाय विविधता और सभी समुदायों को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों पर आधारित है।

ज्ञापन में निकाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे विषयों का भी उल्लेख किया गया। संगठन का कहना है कि इन मामलों से जुड़े पारंपरिक और धार्मिक नियमों में बदलाव की आशंका के कारण समाज के एक वर्ग में असुरक्षा और अविश्वास की भावना उत्पन्न हो रही है।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि UCC का विरोध मुस्लिम समाज की धार्मिक स्वायत्तता, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश सचिव मोहम्मद अयूब कासमी, जिला अध्यक्ष मुफ्ती शकील कासमी, उपाध्यक्ष मौलाना अब्दुल जब्बार, जिला सचिव मुफ्ती इरशाद कासमी, जिला महासचिव मौलाना उस्मान, मुस्ताक खान मोयल, एडवोकेट आबिद बेहलिम, शाहीन खान, इस्माइल डायर, मौलाना अब्दुल वाहिद, मौलाना इस्लाम, मौलाना अफजल, हाफिज फारूक सिकरिया, मौलाना जुबेर, मौलाना शमीम, मौलाना मूसा, हाफिज नदीम और मौलाना मोहम्मद सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।