सिद्धमुख/चूरू। सिद्धमुख मंडी में चने की तुलाई को लेकर किसानों का विरोध अब तेज होता जा रहा है। सरकारी खरीद केंद्र पर तुलाई में गड़बड़ी के आरोपों के बाद किसानों ने मंडी परिसर में धरना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि चने के कट्टों के वजन में अंतर आ रहा है, जिससे उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया किसानों के समर्थन में सिद्धमुख मंडी पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं। उनके पहुंचने के बाद किसानों का विरोध और ज्यादा चर्चा में आ गया। किसान अब तुलाई व्यवस्था की निष्पक्ष जांच और खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग पर अड़े हुए हैं।

चने की तुलाई को लेकर क्यों भड़के किसान?

सिद्धमुख मंडी में समर्थन मूल्य पर चने की खरीद के दौरान तुलाई को लेकर किसानों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। किसानों का आरोप है कि वे अपनी उपज पहले से तौलकर मंडी लेकर आए थे, लेकिन खरीद केंद्र पर तुलाई के दौरान वजन अलग बताया गया।

किसानों का कहना है कि खेती में पहले ही लागत काफी बढ़ चुकी है। बीज, खाद, डीजल, मजदूरी और सिंचाई खर्च के बाद किसान को अपनी फसल से ही उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि तुलाई के दौरान वजन में अंतर आता है, तो किसान को सीधा नुकसान झेलना पड़ता है।

मंडी परिसर में किसानों ने शुरू किया धरना

तुलाई में कथित गड़बड़ी के विरोध में किसान मंडी परिसर में एकत्र हुए और धरना शुरू कर दिया। किसानों ने खरीद केंद्र की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक तुलाई प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तब तक किसानों का भरोसा बहाल नहीं हो सकता।

धरने पर बैठे किसानों ने मांग की कि तुलाई में इस्तेमाल हो रहे कांटों और मशीनों की जांच करवाई जाए। इसके साथ ही जिन किसानों की तुलाई पहले हो चुकी है, उनके मामलों की भी समीक्षा की जाए, ताकि यदि किसी किसान को नुकसान हुआ है तो उसे न्याय मिल सके।

किसानों के समर्थन में पहुंचीं कृष्णा पूनिया

किसानों के विरोध के बीच पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया सिद्धमुख मंडी पहुंचीं और धरने पर बैठे किसानों से मुलाकात की। उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और उनके समर्थन में धरने पर बैठ गईं।

कृष्णा पूनिया ने किसानों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि खरीद केंद्रों पर किसानों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से तुलाई व्यवस्था की निष्पक्ष जांच करवाने और किसानों को राहत देने की मांग की।

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टोकन सिस्टम और खरीद प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

किसानों ने सिर्फ तुलाई ही नहीं, बल्कि टोकन सिस्टम और खरीद प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले टोकन लेने वाले किसानों की तुलाई पहले होनी चाहिए, ताकि किसानों को मंडी में बेवजह इंतजार न करना पड़े।

कई किसानों ने आरोप लगाया कि नमी और गुणवत्ता के नाम पर भी उन्हें परेशान किया जाता है। किसानों का कहना है कि यदि फसल खरीद के स्पष्ट नियम हैं, तो उन नियमों को सभी किसानों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।

किसानों की मांग: पारदर्शी तुलाई और निष्पक्ष जांच

धरने पर बैठे किसानों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि खरीद केंद्र पर तुलाई प्रक्रिया कैमरे की निगरानी में होनी चाहिए और हर किसान को उसकी फसल का सही वजन बताया जाना चाहिए।

किसानों ने यह भी मांग उठाई कि यदि तुलाई में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन किसानों को नुकसान हुआ है, उन्हें उचित राहत दी जाए।

सिद्धमुख में किसान आंदोलन बना बड़ा स्थानीय मुद्दा

सिद्धमुख मंडी का यह मामला अब चूरू जिले की बड़ी स्थानीय खबर बन गया है। सिद्धमुख और आसपास के गांवों से आए किसान तुलाई व्यवस्था में सुधार और खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं।

कृष्णा पूनिया के धरने में शामिल होने के बाद इस मामले को राजनीतिक समर्थन भी मिल गया है। अब किसानों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। किसान साफ कह रहे हैं कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक विरोध जारी रह सकता है।

प्रशासन से समाधान की उम्मीद

फिलहाल सिद्धमुख मंडी में किसानों का धरना जारी है और किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। किसानों की मुख्य मांग है कि चने की तुलाई निष्पक्ष तरीके से हो, खरीद केंद्र पर पारदर्शिता रखी जाए और किसी भी किसान को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और किसानों की नाराजगी को शांत करने के लिए क्या समाधान निकालता है।