चूरू। चूरू जिले के सिद्धमुख क्षेत्र के दयावठ गांव में लोन रिकवरी को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि फाइनेंस कंपनी की रिकवरी कार्रवाई के दौरान एक महिला से अभद्र व्यवहार किया गया। मामले के बाद ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार, फाइनेंस कंपनी से जुड़े कर्मचारी बकाया लोन/किस्त की रिकवरी को लेकर गांव पहुंचे थे। इसी दौरान बातचीत बढ़कर विवाद में बदल गई। आरोप है कि रिकवरी के दौरान महिला के साथ कथित रूप से अभद्रता की गई, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई।

सिद्धमुख थाना क्षेत्र के दयावठ गांव का मामला

यह मामला चूरू जिले के सिद्धमुख थाना क्षेत्र के दयावठ गांव से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लोन रिकवरी के नाम पर किसी भी परिवार या महिला के साथ दबाव, धमकी या अभद्र व्यवहार नहीं होना चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन और पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है।

ग्रामीणों ने की जांच की मांग

घटना के बाद गांव में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति पर लोन बकाया है, तो रिकवरी कानूनी प्रक्रिया और नियमों के तहत होनी चाहिए। किसी भी तरह की बदसलूकी या अपमानजनक व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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पीड़ित पक्ष की ओर से मामले में कार्रवाई की मांग की जा रही है। हालांकि, इस मामले में अभी तक पुलिस और संबंधित फाइनेंस कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

लोन रिकवरी में क्या हैं नियम?

लोन रिकवरी के मामलों में रिकवरी एजेंटों को नियमों का पालन करना जरूरी होता है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, regulated entities अपने recovery agents/service providers की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होती हैं। RBI ने recovery के दौरान intimidation, verbal या physical harassment, public humiliation, privacy intrusion, threatening calls और सुबह 8 बजे से पहले या शाम 7 बजे के बाद recovery calls जैसी practices से बचने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस और फाइनेंस कंपनी का पक्ष आना बाकी

इस मामले में पुलिस और फाइनेंस कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। Churu Times इस मामले में संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहा है। पुलिस या कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

स्थानीय लोगों की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं, लोन रिकवरी से जुड़े मामलों में लोगों ने प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश और निगरानी की भी मांग की है।