झुंझुनूं जिले के इस्लामपुर गांव (Islampur Jhunjhunu) में नाम परिवर्तन के प्रस्ताव के विरोध में आज 15 जून को ग्रामीणों की पदयात्रा जारी है। यह पदयात्रा इस्लामपुर से झुंझुनूं कलेक्ट्रेट की ओर आगे बढ़ रही है, जहां ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी में हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा नाम बदलना स्वीकार्य नहीं है, और किसी भी ऐसे फैसले से पहले स्थानीय लोगों की राय लेना जरूरी है।

नाम परिवर्तन को लेकर क्यों बढ़ रहा विरोध?

इस्लामपुर गांव का नाम बदलने के प्रस्ताव के बाद से ही क्षेत्र में असंतोष का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का नाम उनकी पहचान, इतिहास और सामाजिक विरासत से जुड़ा है, जिसे बदलना उचित नहीं है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि ऐसे निर्णयों में जनता की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह का विवाद न बढ़े।

इस्लामपुर से झुंझुनूं कलेक्ट्रेट तक पदयात्रा जारी

आज सुबह से इस्लामपुर गांव से झुंझुनूं कलेक्ट्रेट की ओर पदयात्रा जारी है। रास्ते में ग्रामीण समूहों में आगे बढ़ते नजर आए और उन्होंने नाम परिवर्तन के विरोध में अपनी आवाज उठाई।

स्थानीय स्तर पर यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी देखी जा रही है।

राजेंद्र सिंह गुढ़ा की भूमिका

इस आंदोलन में पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा (Rajendra Singh Gudha) की सक्रिय भूमिका भी सामने आई है। वे इस मुद्दे पर ग्रामीणों के समर्थन में नजर आ रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर उनका समर्थन इस आंदोलन को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके जुड़ने से इस मुद्दे को और मजबूती मिली है और प्रशासन तक बात पहुंचने की उम्मीद बढ़ी है।

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ग्रामीणों की मुख्य मांग

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि:

  • ✅इस्लामपुर गांव का नाम बदलने का प्रस्ताव वापस लिया जाए

  • ✅गांव की पुरानी पहचान को यथावत रखा जाए

  • ✅किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय लोगों की राय को प्राथमिकता दी जाए

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल नाम का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का सवाल है।

Islampur News Today पर बनी नजर

पूरे झुंझुनूं क्षेत्र में इस समय Islampur News Today चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस आंदोलन पर नजर बनाए हुए हैं कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि झुंझुनूं कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

आगे क्या हो सकता है?

यदि मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है, लेकिन मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।