जयपुर/दूदू। राजस्थान में भैराणा धाम को लेकर चल रहा आंदोलन अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है। दूदू जिले के बिचून क्षेत्र स्थित दादू पालका भैराणा धाम और उसके आसपास की गोचर भूमि को लेकर संत समाज और ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज हो रहा है। इसी बीच नागौर सांसद और RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल की एंट्री से यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भैराणा धाम क्षेत्र में RIICO प्रोजेक्ट और औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार को लेकर स्थानीय ग्रामीण और संत समाज विरोध कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह मामला केवल जमीन का नहीं, बल्कि आस्था, गोचर भूमि और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा हुआ है।
RIICO प्रोजेक्ट को लेकर क्यों हो रहा विरोध?
भैराणा धाम विवाद के केंद्र में दूदू-बिचून क्षेत्र का दादू पालका भैराणा धाम बताया जा रहा है। संत समाज और स्थानीय लोगों का आरोप है कि RIICO प्रोजेक्ट से क्षेत्र की धार्मिक पहचान, गोचर भूमि और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि भैराणा धाम दादू पंथ से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। ग्रामीणों का दावा है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से पशुओं की चराई, धार्मिक गतिविधियां और स्थानीय पर्यावरणीय संतुलन जुड़ा रहा है। इसी वजह से संत समाज और ग्रामीण इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं।
हनुमान बेनीवाल की एंट्री से आंदोलन को मिला राजनीतिक जोर
भैराणा धाम आंदोलन में हनुमान बेनीवाल की एंट्री के बाद मामला और गरमा गया है। बेनीवाल ने इस मुद्दे को आस्था, किसान, ग्रामीण और गोचर भूमि से जोड़ते हुए सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग की है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बेनीवाल ने भैराणा धाम पहुंचकर अग्नितप कर रहे संतों से मुलाकात की और आंदोलन को समर्थन दिया। इसके बाद RLP कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच जयपुर कूच और सरकार से आर-पार की रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हनुमान बेनीवाल की सक्रियता से यह मुद्दा अब केवल स्थानीय विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजस्थान की राजनीति में सरकार के लिए संवेदनशील विषय बन सकता है।
संतों का अग्नितप और महापंचायत की तैयारी
भैराणा धाम को बचाने की मांग को लेकर संत समाज पिछले कई दिनों से विरोध कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में संतों के अग्नितप और धरने का जिक्र भी सामने आया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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भैराणा धाम पर महापंचायत के जरिए आगे की रणनीति तय करने की तैयारी है। इस महापंचायत में संत समाज, ग्रामीण, किसान संगठनों और RLP कार्यकर्ताओं की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है।
गोचर भूमि और पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा
भैराणा धाम आंदोलन को संत समाज और ग्रामीण केवल धार्मिक मुद्दा नहीं मान रहे, बल्कि इसे गोचर भूमि और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा आंदोलन बता रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक गतिविधियों से क्षेत्र के प्राकृतिक माहौल और पशुधन से जुड़ी व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि राजस्थान जैसे राज्य में गोचर भूमि और हरित क्षेत्र की सुरक्षा बेहद जरूरी है। उनका दावा है कि विकास के नाम पर धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व वाले क्षेत्रों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
भैराणा धाम आंदोलन सरकार के लिए अब संवेदनशील मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ औद्योगिक विकास और निवेश से जुड़ा सवाल है, वहीं दूसरी तरफ संत समाज, ग्रामीणों, गोचर भूमि और पर्यावरण संरक्षण की मांग है।
अगर आंदोलन आगे बढ़ता है और जयपुर कूच जैसा कदम उठाया जाता है, तो सरकार और प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक दबाव भी बढ़ सकता है।
प्रशासन और RIICO के जवाब पर टिकी नजर
इस पूरे मामले में प्रशासन और RIICO का आधिकारिक पक्ष अहम है। आंदोलनकारियों के आरोपों और मांगों पर सरकार या RIICO की ओर से स्पष्ट जवाब आने के बाद स्थिति और साफ होगी।
फिलहाल भैराणा धाम आंदोलन में हनुमान बेनीवाल की एंट्री के बाद मामला और तेज हो गया है। संत समाज, ग्रामीण और RLP कार्यकर्ता आगे क्या रणनीति अपनाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Churu Times इस मामले पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन, RIICO या आंदोलन से जुड़े पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
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