चूरू। राजस्थान यूथ कांग्रेस चुनाव में मतदान जारी है और चूरू में युवा नेतृत्व को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच सियासी बातचीत तेज हो गई है। जिलाध्यक्ष पद को लेकर चल रही इस प्रक्रिया में आसिफ खान चूरू का नाम उन चेहरों में शामिल है, जिनकी पहचान केवल संगठनात्मक गतिविधियों से नहीं, बल्कि स्थानीय जनमुद्दों पर लगातार मौजूदगी से भी बनी है।
चूरू युवा कांग्रेस की राजनीति में इस बार मुकाबला सिर्फ पद या समर्थन का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी है जो कार्यकर्ता किसी चेहरे में देखते हैं। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले आसिफ खान ने पिछले कुछ वर्षों में डीबी अस्पताल चूरू, नगर परिषद, जलभराव, सीवरेज, सफाई व्यवस्था, वार्डों की समस्याओं और पेयजल संकट जैसे मुद्दों पर अपनी भूमिका दर्ज कराई है। यही वजह है कि वोटिंग के दौरान उनका नाम स्थानीय राजनीतिक बातचीत में प्रमुखता से लिया जा रहा है।
वोटिंग के बीच कार्यकर्ताओं की पसंद पर नजर
यूथ कांग्रेस चुनाव में डिजिटल सदस्यता और ऑनलाइन वोटिंग ने कार्यकर्ताओं की भूमिका को पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है। अब जिला स्तर पर वही चेहरा असरदार माना जा रहा है, जो संगठन के भीतर भी सक्रिय हो और जमीन पर भी दिखाई देता हो।
चूरू में युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद को लेकर कार्यकर्ताओं की नजर उन नेताओं पर है, जिन्होंने चुनावी समय के अलावा सामान्य दिनों में भी लोगों के बीच अपनी मौजूदगी रखी। आसिफ खान का नाम इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। उनकी राजनीति का बड़ा हिस्सा स्थानीय समस्याओं, युवा संवाद और संगठन से जुड़े कामकाज के आसपास दिखाई देता है।
लोहिया कॉलेज से शुरू हुआ सफर
आसिफ खान चूरू का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। वर्ष 2016 में उन्होंने लोहिया कॉलेज चूरू में महासचिव पद का चुनाव लड़ा। कॉलेज परिसर की राजनीति ने उन्हें युवाओं के बीच काम करने, संगठन को समझने और चुनावी प्रक्रिया का शुरुआती अनुभव दिया।
इसके बाद वे एनएसयूआई और युवा कांग्रेस की गतिविधियों से जुड़े रहे। वर्ष 2018 में एनएसयूआई प्रदेश महासचिव के रूप में उनकी भूमिका सामने आई। छात्र राजनीति से जिला स्तर की युवा कांग्रेस राजनीति तक उनका सफर चूरू के युवाओं के बीच उनकी पहचान का अहम आधार माना जाता है।
छात्र राजनीति से निकले नेताओं की खास बात यह होती है कि वे कार्यकर्ताओं की भाषा, स्थानीय माहौल और युवा वर्ग की उम्मीदों को करीब से समझते हैं। आसिफ खान की छवि भी इसी पृष्ठभूमि में तैयार हुई है।
डीबी अस्पताल से उठा जवाबदेही का सवाल
चूरू का राजकीय डीबी अस्पताल जिले के हजारों परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा संस्थान है। शहर से लेकर गांवों तक के मरीज इलाज के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्था, सफाई, जांच सुविधा, उपचार और मरीजों की परेशानी का सवाल सीधे आमजन के जीवन से जुड़ जाता है।
आसिफ खान ने डीबी अस्पताल से जुड़े मुद्दों को इसी नज़रिए से उठाया। मरीजों और उनके परिजनों की दिक्कतों को लेकर प्रशासन से जवाबदेही की मांग ने उन्हें चूरू की युवा राजनीति में एक मुखर चेहरे के रूप में सामने रखा। सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर आवाज उठाना उन परिवारों की बात रखना है, जो इलाज के लिए सरकारी सिस्टम पर भरोसा करते हैं।
डीबी अस्पताल का मुद्दा आसिफ खान की राजनीतिक पहचान में अहम पड़ाव माना जाता है। इससे उनकी छवि केवल संगठन तक सीमित नहीं रही, बल्कि जनहित से जुड़े विषयों पर बोलने वाले युवा नेता के रूप में बनी।
नगर परिषद के मुद्दों ने दी स्थानीय राजनीति को धार
चूरू शहर में नगर परिषद से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करती रही हैं। कहीं सड़क पर पानी जमा होता है, कहीं नालियों की सफाई अधूरी रहती है, कहीं सीवरेज कार्य के बाद सड़कें टूटी रह जाती हैं। ये मुद्दे देखने में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन आम आदमी के लिए यही रोजमर्रा की सबसे बड़ी परेशानी बन जाते हैं।
आसिफ खान ने नगर परिषद चूरू से जुड़े ऐसे सवालों को कई बार उठाया। गंदे पानी का भराव, सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं की कमी, वार्डों की अनदेखी और टूटी सड़कों जैसे विषयों पर उन्होंने प्रशासन का ध्यान खींचने की कोशिश की।
चूरू की स्थानीय राजनीति में इन बातों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि इनका असर सीधे लोगों के घरों, दुकानों, स्कूल जाने वाले बच्चों और रोजमर्रा की आवाजाही पर पड़ता है। यही मुद्दे किसी भी युवा नेता की जमीन तय करते हैं।
पानी निकासी और सीवरेज: गलियों से उठती नाराजगी
चूरू शहर के कई हिस्सों में जलभराव और सीवरेज की समस्या बार-बार सामने आती रही है। बारिश के बाद निचले इलाकों में जमा पानी लोगों की मुश्किलें बढ़ा देता है। कई जगहों पर गंदे पानी का भराव रास्तों, घरों और दुकानों के आसपास तक पहुंच जाता है।
राजकीय जिला अस्पताल, लोहिया कॉलेज चूरू, नेत्र अस्पताल के सामने का क्षेत्र, इंद्रा कॉलोनी, तकिया ताजुशाह इलाका, मोहल्ला सब्जिफरोश, सैनिक बस्ती और कृषि उपज मंडी के पीछे के हिस्से लंबे समय से पानी निकासी और सफाई से जुड़े सवालों को लेकर चर्चा में रहे हैं।
वार्ड 30, वार्ड 37, वार्ड 3, वार्ड 38, वार्ड 41 और वार्ड 46 जैसे इलाकों की समस्याएं भी स्थानीय बहस का हिस्सा रही हैं। पुरानी सड़क, रेलवे स्टेशन के आसपास सार्वजनिक सुविधा, सीवरेज कार्य के बाद टूटी सड़कों की मरम्मत और नियमित सफाई जैसे विषयों ने शहर के लोगों में नाराजगी बढ़ाई है।
इन मुद्दों को उठाकर आसिफ खान ने अपनी भूमिका को केवल संगठनात्मक राजनीति तक सीमित नहीं रहने दिया। उन्होंने चूरू की गलियों और वार्डों से जुड़े सवालों को अपने राजनीतिक कामकाज का हिस्सा बनाया।





